गुरु का ज्ञान और मेहनत का रहस्य(The Guru’s Wisdom and the Secret of Hard Work)

गुरु शिष्य 
Guru Disciple

एक आश्रम में एक गुरु रहते थे और बहुत सारे शिष्य उनके साथ रहते थे सब उनकी बातें मानते थे लेकिन उनमें से एक शिष्य बहुत आलसी था वह काम को टालता रहता के थोड़ी देर में कर लेगा या कल कर लेगा उसका यही जवाब रहता गुरुजी उसे देखकर बहुत परेशान होते जब भी गुरुजी उसे व्यक्ति भिक्षा मांग कर लाओ सभी गुरुजी की बात सुनकर भिक्षा मांगने चले गए लेकिन वही शिष्य भिक्षा मांगे नहीं जाता गुरुजी ने कारण पूछा तो वह कहने लगा के मैं कल भिक्षा मांग कर लाऊंगा फिर गुरु जी ने उस  शिष्य से कहा के आश्रम का दरवाजा खुला है वह बंद कर दो लेकिन उसने उसको भी टाल दिया गुरुजी ने फिर कहां के दरवाजा बंद कर दो लेकिन उसने फिर भी अनसुना कर दिया गुरुजी ने सोचा के इसका आलस छुड़वाना ही होगा एक दिन गुरुजी आश्रम से बाहर जा रहे थे तब गुरु जी ने उस आलसी शिष्य से कहां के यह एक ऐसी वस्तु है जो सोना बना देती है किसी भी वस्तु पर लगते ही यह वस्तु मैं तुम्हें दे रहा हूं तब तक तुम इससे कितना भी सोना बना सकते हो और अमीर बन सकते हो लेकिन सुबह सूर्य उदय होने पर मैं तुमसे यह वस्तु ले लूंगा शिष्य ने कहा ठीक है शिष्य मन ही मन खुश होने लगता है लेकिन वह बहुत ही  आलसी रहता है गुरुजी उस वस्तु को देकर चले जाते है वह शिष्य सोचता है अब तो मैं अमीर बन जाऊंगा जितना चाहता हूं उतना सोना बना सकता हूं और वह उस चीज को संभाल कर रख देता है और सो जाता है गुरुजी तो सुबह सूर्या उदय को लेंगे उन्होंने कहा है मैं तो एकदम अमीर बन जाऊंगा वह यह सोचता सोचता सो जाता है उसकी नींद सूर्य उदय से पहले खुल जाती है लेकिन वह उसी जगह लेटा रहता है के थोड़ी देर में उठूंगा के थोड़ी देर में उठा लूंगा ऐसे करते करते उसे सूर्य उदय हो जाता है और गुरुजी भी उससे आकर वह  वस्तु वापस ले लेते हैं और वह वैसे का वैसा ही रह जाता है आलस के कारण

इस कहानी से हमने क्या सीखा
What did we learn from this story

इस  कहानी से हमने और आपने सीखा कि हमें आलस नहीं करना चाहिए और जो आज करना है वह थोड़ी देर और कल की वजह आज ही करें आपका काम और आपकी मेहनत ही आपको सफल और कामयाब  बनाती हैं आलस बेकार है इसे छोड़ दीजिए अगर आपने आलस नहीं छोड़ा तो यह आपको किसी काबिल नहीं छोड़ेगा

मेहनत करके ही सब सफल बनते हैं
Everyone becomes successful only through hard work.

हर इंसान की सफलता के पीछे उसकी बहुत मेहनत छुपी होती है जिस तरह एक मकान बनाने के लिए उसमें बहुत दिन तक काम करना पड़ता है और पैसा बीच में कम पड़ जाए तो काम को बीच में रोकना पड़ता है ठीक वैसे ही जैसे कोई दिक्कत आ जाती है तो वह काम कुछ समय तक बंद करना पड़ता है और जैसे ही हमें लगता है कि अब हम उस काम को कर सकते हैं उसी मेहनत के साथ तो हम उस काम को करना शुरू कर देते हैं जैसे ही हमारे पास पैसा आता है हम अपने मकान का काम शुरू कर देते हैं और जैसे ही वह काम पूरा हो जाता है तो मकान पूरा बन जाता है वैसे ही सफलता है जैसे ही हमारी मेहनत पूरी हो जाती हैं और हर तरह से सही लगता है वैसे ही हमें सफलता मिल जाती है और हमारा मकसद पूरा हो जाता है
सफलता कड़ी मेहनत करने के बाद ही मिलती है जिस तरह हमें अपनी जिंदगी और मौत के बारे में या अन्य किसी चीज के बारे में पता ही नहीं होता और हर रोज जीए जाते हैं  लेकिन जब आपकी उम्र पूरी हो जाएगी तो हमें इस संसार से अलविदा लेना होगा  जिस तरह हम जिंदगी जीते जाते हैं और जब हमारी उम्र पूरी हो जाती हैं तो मौत भी हमें लेने आ जाती है ठीक वैसे ही हम अपना मकसद पूरा करने के लिए हर रोज मेहनत करते हैं मगर यह तो नहीं पता होता कि हमें सफलता कब मिलेगी बस खुद का अनुमान लगाए रहते हैं के हमें इतने दिन के बाद या इतने महीनों के बाद या कुछ सालों के बाद हमें कामयाबी मिल जाएगी लेकिन कभी मिल जाती है और कभी नहीं मिलती जैसे सपोज कीजिए कि हम खाना पकाते हुए इतने टाइम का अनुमान लगा लेते हैं मगर कभी वह उस टाइम से पहले भी पक जाता है और बाद में भी पकता है और उतने समय में भी पक जाता है ठीक है ऐसे ही अनुमान लगाकर हम मेहनत करते हैं

ऐसा भी होता है
Things like this happen too.

एक अमरूद का पेड़ मैंने लगाया मगर उस पर आज तक एक अमरूद  भी नहीं आया और अमरूद के पेड़ के साथ के पेड़ों पर और उसके बाद के अमरूद के पेड़ों पर अमरूद आते हैं काफी साल से वह न तो  बड़ा हुआ न  हीं  उस पर अमरूद आए उसकी वजह कभी तो उसे बच्चे तोड़ देते हैं तो कभी बंदर लेकिन वह उतने का उतना भी नहीं है वह बढ़ता भी है मगर कुछ ज्यादा नहीं वह अमरूद का पेड़ ऐसे का ऐसा ही है क्या कहूं मैं उस पर अमरूद आएंगे या नहीं आएंगे यह तो मुझे भी नहीं पता है
कभी-कभी हम कितना भी सही काम कर ले और वह गलत हो ही जाता है हम मेहनत हमेशा करते हैं और फिर भी असफल हमें होना पड़ता है कुछ चीजें वैसे ही हमारे बस में नहीं होती है लेकिन हम जीना तो नहीं छोड़ते है अगर दुख हमारे जीवन में आए जाता है तो हम उस से लड़ते हैं और लड़ना भी चाहिए क्योंकि हमेशा तक कोई चीज नहीं रहती अगर हम अपने फैसले पर अटल हो जाते हैं तो सामने वाले को झुकना ही पड़ता है अगर हम अपना मकसद उसी एक चीज को बनाए रखते हैं तो हम एक बार असफल होंगे दोबारा असफल होंगे तीन चार बार मगर उस असफलता से कुछ ना कुछ सीखेंगे जरूर क्योंकि हम असफल जब भी होते हैं जब हम उस काम में कोई कमी कर देते हैं और उस कमी का पता नहीं चलता कुछ लोग अपनी कमियां ढूंढते हैं तो कुछ उस कमी को अपनी हार समझ कर बैठ जाते हैं मगर सफल वही लोग होते हैं जो अपनी कमी को ढूंढते हैं वह नहीं जो कमी को हार समझ बैठते हैं
किसी चीज में ज्यादा डूबो तो उस चीज के बारे में ज्ञान मिलता है बल्कि  परेशानी दिक्कत या दुख भी कह सकते हैं यह सारे  नाम एक ही चीज के हैं 

दिक्कतें
Difficulties

दिक्कतें हमारी जिंदगी में परीक्षा बनकर आती हैं यह जानने के लिए कि जो चीज आप पाने की इच्छा रखते हैं आप उसके काबिल है या नहीं इसलिए परीक्षा होती हैं स्कूलों में कॉलेजों में ताकि पता लग पाए कि कौन अपनी मेहनत और बल पर परीक्षा को पूरा कर पाता  है कौन इसके लिए कितनी मेहनत करता है कौन लायक है यह सब पता चल जाता है जब रिजल्ट आता है तब पता चलता है क्योंकि देखने से हम किसी का अनुमान नहीं लगा पाते हैं कि वह क्या है वह कैसा है सफलता हमें तब ही मिलती है और उतनी ही मिलती है  जितनी हम उसे पाने के लिए मेहनत करते हैं
प्रेरणा हमें दुख से ही मिलती है सुख से हमें भटकाव मिलता  है ज्ञान और सीख दुख से ही मिलती हैं इसलिए तो मेहनत किए बिना सफलता नहीं मिलती 

तिनका और पत्थर
Straw and stone 

अगर हम एक तिनका उठाकर फेंकते हैं तो वह ज्यादा दूर नहीं जा पाता क्योंकि उसकी वजह यह नहीं कि हम उसे दूर फेंक नहीं पाए उसकी वजह यह थी की वह हल्का था इसलिए वह ज्यादा दूर नहीं जा सका और आप अगर छोटे से पत्थर की कंकड़ उठाकर फेकेंगे तो वह बहुत दूर जाती है इसलिए क्योंकि उसमें वजन है इस तरह आप दूर फेंकने पर फोकस मत कीजिए बल्कि यह देखिए के आप फेंक क्या रहे हैं तिनका या पत्थर क्योंकि तिनके में वजन नहीं होता और पत्थर में होता है तो प्रेरणा दुख से ही मिलती है क्योंकि तब हमे उस दुख से लड़ने की ताकत आ जाती है अगर दुख हमारे जीवन में नहीं आएगा तो हम इक हल्के तिनके की तरह रहेंगे जिंदगी में सुख दुख का होना उतना ही अनिवार्य है जितना कि सर्दियों के मौसम में सर्दियों का होना जरूरी है अगर एक सा मौसम रहेगा तो हम दूसरे मौसम के बारे में जान नहीं पाएंगे तो हम उस मौसम का आनंद कैसे ले पाएंगे

दीपक जैसी है इंसान की जिंदगी
A human life is like a lamp.

दीपक जब तक जलता है उसमें तेल और बाती होती है अगर एक भी चीज कम पड़ जाए तो वह बुझ जाता है क्योंकि उसमें दोनों चीज बराबर होनी चाहिए ऐसे ही पैसे और इंसान का रिश्ता ऐसा ही है अगर पैसा उसके पास नहीं होता तो बुझ जाता है दीपक की तरह जिस तरह वह कुछ पल तेल के बिना तो जल सकता है लेकिन बाती के बिना कैसे जल सकता है ठीक उसी तरह वह कुछ पल ही जी सकता है पैसे के बिना लेकिन सांसो के बगैर नहीं जी सकता इंसान क्योंकि सांसे भी अब पैसों से खरीदी जाती है जैसे पैसे के बिना इंसान बीमार व्यक्ति है जिसे इलाज के लिए पैसा चाहिए होता है दीपक जब तक जनता है जब तक रोशनी होती है वैसे ही जब तक पैसा है इंसान के पास तब तक इंसान जिंदा है

मजदूरी और दीपक 
Labor and lamps

आप लोग अगर यह चाहते हैं के आप मजदूरी करके भला कर लेंगे या जीवन जी लेंगे तो यह नामुमकिन है क्योंकि दीपक भी तब तक जलता है जब तक आप उसमें समय पर तेल और बाती उसने रखेंगे तब तक वह जलेगा अगर तेल और बाती खत्म हो गई तो वह बुझ जाएगा वैसे ही मजदूरी हर रोज मिले तो जिंदगी कट सकती है और एक मिले और 10 दिन की छुट्टी रहे तो भिखारी जैसी हालत रहती हैं मजदूरी करने वालों की और ऊपर से परिवार की जिम्मेदारी तो उस भिकारी से भी गैर गुजरी हालत रहती है हम लोग मेहनत तो करते हैं मगर गलत जगह करते हैं इसलिए जो गरीब है वह गरीब है और जो अमीर है वह अमीर ही है

हर समस्या का समाधान आपके पास है 
you have the solution to every problem.

वास्तव में मानव प्रतिनिधि प्रजनन उत्पादन होने की वजह से समस्या आती जाती रहती हैं इन से कैसे बचना है यह हम तय करते हैं हमें खुदका बचाओ अच्छी तरह से करना आना चाहिए इसमें काफी नहीं बहुत ज्यादा नॉलीज का होना हमारे लिए जरूरी है जिंदगी में दिक्कतें आती जाती रहती है हमें इनसे कैसे बचना है यह हमें बिल्कुल निसंकोच आना चाहिए ही चाहिए इसमें अगर आप परफेक्ट नहीं है तो आप दुखी रहेंगे क्योंकि हारते रहेंगे जीत नहीं पाएंगे तो आप किस्मत को दोष देंगे ईश्वर को दोष देंगे या मां-बाप को दोष देंगे लेकिन इसमें कमी हमारी रहती है कि हम परफेक्ट नहीं हुए समस्या से लड़ना या बचना हमने सीखा नहीं जिंदगी को जीना हमें आता नहीं और दोष दूसरों को दे यह बिल्कुल बेकार है जिस तरह गिद्ध और बाज अपनी समस्या से बचता है कठिन मेहनत करके दुखों को बर्दाश्त करके उनका सामना करता है और अंत में जीत जाता है वैसे ही मानव जीवन है हमारी समस्याओं का समाधान हमारे पास है हम जीत भी सकते हैं कठिन मेहनत करके और हार भी जाते हैं उन समस्याओं को देखकर और अगर उनका सामना करते है तो हमें जीत ही हासिल होती है बल्कि हमें ज्ञान भी प्राप्त होता है जिंदगी को आप तेज भी चला सकते हैं और आराम से भी हाई या सीलो ब्रिक आपके या हमारे हाथ में है अगर कोई बच्चा या बड़ा चला रहा हो और वह तेज से चला रहा हो तो और उसे नीचे उतरना हो तभी तो वह धीरे- से भी उतर सकता है और बीच में से हाई रफ्तार पर रुक सकता है लेकिन उसके लिए उसे सीखना जरूरी है तब ही वह सही से नीचे उतर पाएगा वरना चोट खाएगा ही खाएगा अगर उसे नॉलीज नहीं है तो फायदा उसी मैं है के वह धीरे से उत्तरे तेज मोटरसाइकिल से ब्रिक ने मारे अगर मारे तो उसे रोकने के लिए उसे नॉलीज होना जरूरी है तब ही हम और आप चोट खाने से बच सकते हैं वरना चोट लगेगी ही लगेगी अगर नॉलीज नहीं होगी तो
बिन मेहनत के बिन कठिनाई के कुछ नहीं मिलता आसान कुछ भी नहीं है न जीवन न हीं सफलता हर मकसद को पूरा करने के लिए मेहनत करनी पड़ती है और बिन नॉलीज के न तो इज्जत मिलती हैं न हीं पैसा जिसे नॉलीज नहीं उसे लोग पागल कहते हैं और जिसके पास नॉलीज नहीं वह पैसा भी नहीं कमा सकता आप हर चीज को तभी पा सकते हैं जब आपके पास पैसा और नॉलीज होगी क्योंकि बिना पैसे के तो न तो जरूरत पूरी होती है न हीं शौक
सबसे पहले खुद का भरोसा और फिर अपने काम का और फिर अपनी मेहनत पर भरोसा होना चाहिए क्योंकि अगर आपको भरोसा होगा खुद पर तो आप में हिम्मत अपनाप आ जाएगी तो हिम्मत खुद ही बढ़ जाएगी काम कोई भी करो मगर उसमें फेमस होना चाहिए आपको

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