बोझ
burden
रिश्ते बोझ बन ही जाते हैं जब एक व्यक्ति ही पूरे घर की जिम्मेदारी समालता है और सब कुछ वह ही करता हैं खाने से लेकर पहनने के कपड़े पढ़ने से लेकर शौक तक वह अकेला ही देखता है वह पूरा परिवार का खर्च करता है और उनकी जरूरतों को पूरा करता है पूरे परिवार में वह अकेला ही काम करता है क्योंकि परिवार में खर्च बहुत होते हैं तो उसके पैसों का पता ही नहीं चलेगा क्योंकि वह कितना भी पैसा कमा लें गरीब और बड़े परिवार में वह भी कम पड़ेगा क्योंकि मजदूरी मैं किसी का भला नहीं होता
बदलाब
change
धीरे-धीरे उस व्यक्ति का शौभाव बदल ही जाता है चाहे वह व्यक्ति अपने परिवार से कितना भी प्यार क्यो न करता हो लेकिन वह कुछ समय बाद बदल ही जाता है उसे लगने लगता है, के केवल मै ही अकेला काम करता हूँ और ये सब मजे मे रहते है खाते है और यह सब आराम से रहते है मेरे पैसों पर मैं दिन भर काम मैं लगा रहता हूं मेरे पास मेहनत करते हुए भी पैसे नहीं रहते और यह पूरे ऐसो आराम मैं रहते है
तनाव
Tension
पैसे की चिन्ता मुझे हर पल परेशान करती है इतनी मेहनत करने के बाद भी मैं इक – इक पैसे को तरसता हूँ यह बात सोच-सोचकर उसका शौभाव बदलने लगता है उसे टेंशन रहने लगती है और वह हर किसी से गुस्से से बात करता है सब खुश रहते है जब भी वह मुस्कुराता तक ही वह दुखी हो जाता अब वह उदाश रहने लगता है उसका शौभाव बिलकुल बदल जाता है वह पहले जैसे नही रहता है पहले खुश रहता था मगर अब तो उसे देखकर ऐसा लगता है जैसे मुस्कुराहट भी उसके चहरे पर कभी आई ही नही हो
लड़ाईयाँ
Battles
जब खर्च ज्यादा और पैसा कम होता है तब परिवार- में लड़ाईयाँ होती ही है अगर वह बच्चो को कुछ लिवाकर नही देता तो पत्नि को गुस्सा आता है के बच्चो को भी देखना पंसद नही करता ने उसके साथ ज्यादा बात करता है पत्नि यह सब बाते सोचती है और पति के दिमाग मे टेन्सन रहती है पैसों की वजय से वह पैसे कैसे कमाये और कहाँ से लाकर आप और उस बीच मे बच्चे वहाँ पहुँच जाते हैं, वह पैसे के बारे में काम के बारे में सोच रहा होता है और वहाँ बच्चे जाकर शोर मचाने लगते हैं, और जोर जोर से खेलते हुये तो वह व्यक्ति बच्चो को गुस्से में डाटता है और वह नही मानते तो वह बच्चों को मार देता है उनके रोने की आवाज़ सुनकर पत्नी वहां पहुंचती है वह बच्चो को रोता देख वह पति पर गुस्सा देखाती है. अभी तो बच्चे तुम्हारे पास आये थे और अभी तुमने इन्हे रोला दिया जबकि यह पूरे दिन मेरे पास रहते है. इतना कहकर वह बच्ची को वहीं से ले आती है अब व्यक्ति अफसोस करता है कि मुझे बच्चों के साथ ऐसा नहीं करना चाहिए था मैंने यह गलत किया है
जेंट्स
Gents
जेंट्स कुछ व्यक्ति ऐसे भी होते हैंभी होते है जो बच्चो को तो मारते है और पत्नि उन्हें कहती है तो वह उन्हें भी मारते है और लड़ाई करते है ऐसे पति पत्नि के रिश्ते मे दरार भी पड़ जाती है पत्नि की गलती कम होती है और पति की ज्यादा बस पत्नी बच्चो को मारने को हाटने से कहती है वह अपनी गलती मानने को तैयार नहीं और अपनी पत्नि को कहता है, जब मैं टेंशन में था और मैंने इन्हें मना किया था तो यह फिर भी नहीं माने तब मुझे इनपर मजबूरन हाथ उठाना पड़ा और तू मुझे ही कह रही है उन्हें डांटने के बजय वह अपनी पत्नी कि नहीं सुनता और गालियां देता है उसे मारता है पत्नी की कमी इतनी रहती है की वह पति पर निर्भर रहती है क्योकि वह पैसा कमाता है और वह नहीं कमाती इसलिये पत्नी पति पर डिपेंड रहती है इसलिए वह अकड़ दिखाता है चाहे वह आपका बाप हो माँ हो भाई हो बहन हो चाहे आपका पति हो सब अकड़ देखाते है पैसों पर
पैसे की कमी
short of money
जिंदगी पैसे से चलती हैं और पैसा मेहनत से मिलता है जहाँ पैसे की कमी हो वहाँ ऐसा व्यवहार देखने को मिलता ही है किसी चीज़ की परिवार में कमी हो जाये तो लड़ाई होती है या कोई शौक अधूरा रह जाये तो छोटी-छोटी बातो पे लोग लड़ते है कभी काम के ऊपर तो कभी खाने के ऊपर तो कभी पहनने के ऊपर परिवार मै एक दूसरे को कह देते हैं के अपने ही कपड़े बनाता रहता हमारे नहीं या हमारे कपड़े नहीं बनवाते और उसके बनवाते रहते हैं हमें इतना चाहते ही नहीं इसके लिए सब कुछ करते है और जब मैं कहते या कहती तो मना कर देते है कभी कभी बड़े तो कभी बच्चे तो कभी पत्नि कहती है हमे क्या लिवाकर दे रहे हो इतने दिन हो गये ऐसा अक्षर उनमे रोज-रोज या तीन चार दिन होता ही रहता है और रिश्ती में दरार हो जाती है जिंदगी बहुत कठनाईयों से जी जाती है अक्षर ऐसे लोग जिंदगी जीते नहीं काटते है
जरूरत
Need
इनकी जरूरत पूरी नही हो पाती है क्योकि पैसा इनके पास नही रहता पैसा आता उनके पास बाद मे और तब तक खर्च बहुत सारे हो जाते है ‘उनके खर्च ही पूरे नहीं हो पाते इतना कम पैसा इनके पास रहता है वह अपनी जरूरत ही पूरी कर पाते ऐसा उनका हाल रहता है
वजय
Victory
अगर व्यक्ति बीमार हो भी जाए तो वह अपना इलाज तक भी नहीं करा पाता वह इग्नोर करता रहता है अपनी बीमारी की थोड़ी बहुत दवाई डॉक्टर से ले लेता है और काम पर जाता है एक ऐसे ही व्यक्ति की यह कहानी है जिसे पढ़कर आप सोच में पड़ जाएंगे यह भी हो सकता है हां यह सच है यह संभव है
मजबुरी
compulsion
एक व्यक्ति था जो मजदूरी करता था उसके परिवार में 7 सदस्य दोनो पति-पत्नि 5 बच्चे रहते उनके बच्चे छोटे छोटे होते है वह भी अपने बच्चों को लाड प्यार से पालना चाहते हैं लेकिन उनके पास इतने पैसे नहीं रहते जो वह अपने बच्चों की इच्छाएं और अपनी इच्छाएं पूरी कर सके वह बहुत गरीब रहता है उन सब की जमेदारी उस पर रहती है पूरे परिवार मे केवल वही काम करता है उनका लालन पोषण वही करता है वह बीमार भी रहता है, थोड़ी थोड़ी दवाई डॉक्टर से लेकर खा लेता फिर काम पर चला जाता उसका हर रोज का काम यही रहता है उसकी कोक में दर्द रहता था वह उस बीमारी को नज़रअंदाज़ कर, रहा था और उसके पास इतने भी पैसे नहीं रहते कि वह अपना इलाज कराले एक बार वह थोड़ा ज्यादा बीमार हो जाता है तो डॉक्टर कहता है कि तुम खून की जांच या एटा सॉन्ग कराओ वह डॉक्टर के कहने से किसी से पैसे उधर लेकर अपने खून की जांच कराता है डॉक्टर को उस बीमारी का पता नहीं चलता तो फिर वह उस व्यक्ति को एटा सॉन्ग करवाने के लिए कहता है वह डॉक्टर से कुछ दिन मांगता है कि मैं एटा सॉन्ग बाद मैं करूऊंगा अभी मेरे पास इतना बजट नहीं है वह डॉक्टर कहता है ठीक है वह व्यक्ति कुछ दिनों बाद मे अपना एटा सॉन्ग करवा लेता है डॉक्टर एटा सॉन्ग देखता है और उस व्यक्ति से कहता है तुम्हारे गुर्दे में पथरी है आप अपना इलाज करवा लो वह व्यक्ति डॉक्टर की बात सुनकर परेशान हो जाता है और सोचता है कि मैं पहले से ही कम परेशान था जो एक और परेशानी आ गई डॉक्टर आराम को कहता है उस व्यक्ति को लेकिन वह चार या पांच दिन है आराम कर पाता है क्योंकि उसे चिंता थी अपने परिवार की और एक वह खुद बीमार था और उसका परिवार परेशान था कुछ उसकी वजह से तो कुछ खर्च की वजह से क्योंकि घर मैं का सामान खत्म हो चुका था खाने पीने का क्योंकि वही व्यक्ति तो काम करता था तब जाके पैसे और सामान आता था उस घर में अब वही व्यक्ति बीमार था दवाई तो तब आती जब पैसे होते हैं और पैसे ही नहीं थे खाने के लिए है ही नहीं थे फिर वह बीमारी में भी काम करने गया और रोज दवाई लेता उसे खाकर काम पर जाता डॉक्टर भी उसे देखकर हैरान था डॉक्टर उससे कहता तुम काम मत करो तुम्हारे गुर्दे में दिक्कत आ सकती है क्योंकि वह दवाई पथरी बाहर निकालने के लिए खा रहा था डॉक्टर को उसकी हालत का पता था क्योंकि उसने डॉक्टर से अपनी मजबूरी बता दी थी समय बिकता गया अब उसके बच्चे थोड़े थोड़े बड़े हो चुके थे फिर कुछ दिन बाद वह बहुत ज्यादा बीमार हो गया उसके बचने की भी कोई उम्मीद नहीं थी उसकी पत्नी उसे कई हॉस्पिटल मैं दिखाती है लेकिन सब उसकी हालत देखकर मना कर देते पूरी रात वह अपने पति को एंबुलेंस मैं लेकर कई हॉस्पिटल जाती है लेकिन कोई ज्यादा पैसे बताता तो कोई देखकर ही मना कर देता लेकिन गारंटी कोई डॉक्टर नहीं ले रहा था फिर वह हर थक्कर अपने घर आती है कुछ रिश्तेदार और कुछ गांव के उसे पैसा इकट्ठा करके देते हैं और लास्ट हॉस्पिटल मैं वह अपने पति को ले जाती हैं उस हॉस्पिटल से वह व्यक्ति थोड़ा ठीक होकर अपने घर जाता है लेकिन वह पूरी तरह ठीक नहीं होता उसके गुर्दे में पाइप लग रहा था उसी हॉस्पिटल से उसकी दवाई चलने लगती है को देखकर उसकी पत्नी भी मजदूरी करने लगती है हालात इतना मजबूर कर देते हैं वह यह सब देख कर और ज्यादा दुखी था अब वह ठीक से चलने लगा था वह काम पर जाना शुरू कर देता है उसका बेटा और उसकी पत्नी उससे बहुत मना करते हैं काम पर जाने से क्योंकि अभी तक उसके गुर्दे मैं पाइप लग रहा था लेकिन वह कहता है इतना कर्ज़ हो गया है हम पर वह कैसे जाएगा और मेरी हर महीने दवाई आती है वह कैसे आएगी वह अपनी पत्नी से कहता है आज तक तुम मेरे होते हुए कभी घर से बाहर गई हो और आज मेरे होते हुए काम पर जा रही हो यह देख कर मुझे बहुत दुख होता है और यह कह कर वह काम पर चला जाता है जिस व्यक्ति के गुर्दे में जख्म हो और जख्मी हो केवल दो परसेंट ही सही हो वह तेज धूप में गर्मी के मौसम में काम करता है और उसके गुर्दे में पाइप लगा होता है गर्मी के कारण उसके गुर्दे मैं से खून भी आने लगता है वह यह बात किसी को नहीं बताता और समय बीतता जाता है उसका 1 साल पूरा नहीं होता और वह फिर से ज्यादा बीमार हो जाता है इस बार वह मर जाता है जिस हॉस्पिटल से वह ठीक होकर आता है उसी हॉस्पिटल मैं वह मर जाता है
कहानी का महत्व है
मेहनत और लक्ष्य
Hard Work and Goals
इतनी मेहनत करने के बाद भी वह व्यक्ति अपना इलाज तक नहीं करा पाता और मर जाता है क्योंकि वह सही तरीके से पैसा नहीं कमाता वह मेहनत गलत जगह करता है वह अपना A.m बनाकर नहीं रखते हैं मेहनत तो करते हैं पर कुछ खास हासिल नहीं कर पाते वह दुखी और परेशानी में हमेशा जीते हैं क्योंकि वह सही और गलत का तरीका नहीं जान पाते क्योंकि वह हमेशा मजदूरी करते रहते हैं लेकिन अब मजदूरी का जमाना न हीं है नहीं मजदूरी में कुछ होता है आप चैन की दो रोटी तक नहीं खा पाते है दोस्तों आप गलत नहीं हो आप का तरीका गलत है मेहनत करके करोड़पति भी लोग बनते हैं और मेहनत करके मजदूर भी बनते हैं करोड़पति सब कुछ अपनी मर्जी से करता है और मजदूर व्यक्ति दूसरों की सुनता है जिस व्यक्ति को यह बात समझ आ जाती है वह मजदूर नहीं रहते वह भी अपने अस्तित्व को खोजते हैं और अपनों के सपनों को पूरा करना और अपने सपनों को पूरा करने की ठान लेते हैं और तब तक उसका मकसद पूरा होता है जब जाकर एक पहचान मिलती है और यह पहचान हर व्यक्ति के पास नहीं होती है कुछ ही यह व्यक्ति होते हैं जो अपने लक्ष्य को पा लेते हैं यह व्यक्ति अपना एम बना कर चलते हैं इन्हें कब है क्या करना है क्यों करना है सब कुछ यह पहले से ही डिसाइड करके रखते हैं तो इसलिए कहती हूं दोस्तों अपने अस्तित्व को पहचानी खुद की इच्छाओं को जानिए और अपने सपनों को पूरा कीजिए
जरूरत ही सपने है
only dreams are needed
आपका जो भी लक्ष्य हो या मकसद हो उसी आप अपनी जिंदगी का एक अहम भाग बनाकर रखिए ऐसा भाग जिसे आप चाह कर भी छोड़ ना सके चाहे कुछ भी हो जाए आप उस काम के लिए पागल रहिए लक्ष्य को अपने सामने रखें हमेशा उस मकसद के बारे में या मकसद को पूरा करने के बारे में सोचिए इसके लिए भागीऐ दौड़ीऐ वह सब कुछ कीजिए जो आप कर सकते हैं और अपने दिमाग में यह मत आने देना के यह पूरा नहीं होगा बिल्कुल यह सोचिए की यह मुझे चाहिए तो चाहिए चाहिए ही चाहिए और अपने मकसद को सपना मत समझऐ जरूरत समझऐ क्योंकि जरूरत जल्दी पूरी होती है और हर जरूरत को पूरा करने के लिए इंसान बहुत मेहनत ही नहीं करता बल्कि वह उसके पीछे दौड़ता है जब तक जरूरत पूरी नहीं होती है तब तक इंसान मेहनत करता रहता है सपने ही जरूरत है कोई जरूरत कहता है और कुछ व्यक्ति उसे सपना कहते हैं जैसे किसी व्यक्ति को कार चाहिए तो वह कहता है कि यह मेरी जरूरत है और कुछ व्यक्ति है कि मुझे यह कार लेनी है यह है मेरा सपना है दोनों व्यक्तियों को चाहिए एक ही चीज एक व्यक्ति को लेनी है जिसका पता नहीं कब लेकिन वही कार दूसरे व्यक्ति को चाहिए क्योंकि वह उसकी जरूरत बन गई है और एक व्यक्ति अपना सपना समझ बैठा है और जिसके पास ठीक-ठाक पैसे हैं और वह कार खरीद सके वह उसे अपनी जरूरत समझता है क्योंकि वह उसे खरीद सकता है उसके पास पैसा हैं इतना वह तेज धूप में पैदल चलना पसंद नहीं करता जरूरत है उसे कार की उसे वह यह सोचकर खरीदता है आपकी जरूरत जिस तरह से बड़ी और छोटी होती है वैसे ही सपने छोटे और बड़े होते हैं नाम अलग-अलग है पर काम एक हैं ठीक वैसे ही ईश्वर एक है और नाम बहुत सारे हैं
रिश्ते बोझ बन जाते हैं क्यों
Why do relationships become a burden
रिश्ते इसलिए बोझ बन जाते हैं क्योंकि परिवार की सारी जिम्मेदारी एक ही व्यक्ति पर रहती है और वह उस हिसाब से पैसे कमा नहीं पाता और खर्च बहुत ज्यादा रहता है जो वह काम करता है उसमें उसे पैसे कम मिलते हैं या तो परिवार में ज्यादा खर्च है
क्या-क्या करें वह व्यक्ति यह सोचता है
That person wonders what to do.
हर तरफ पैसे की जरूरत रहती है और परिवार का हर शख्स उससे आ आकर अपने-अपने खर्च बताता है हर व्यक्ति अपने पैसे बता कर जाता है मुझे इतना पैसा चाहिए मुझे इतना पैसा चाहिए और उस व्यक्ति पर एक पैसा भी ना हो तो वह क्या करेगा वह खुद को गालियां देगा और उन्हें भी ना चाहते हुए यह कहेगा कि मेरे पास पैसे नहीं है अब तुम खुद भी कुछ करो मैं ही कब तक सब कुछ करूंगा लेकिन वह गलती इतनी करता है वह गुस्से में कहता है प्यार से नहीं इसलिए वह लोग बुरा मान जाते हैं जिस वजह से रिश्तो में दूरियां बन जाती है लेकिन वह उनके बारे में सोच सोच के थक जाता है पैसा कहां से आएगा हर कोशिश कर लेता है तब हार कर उसे उनसे ऐसा सब कहना ही पड़ता है जैसे कोई व्यक्ति परिवार में से बीमार हो जाए और उस व्यक्ति पर पैसा न हो हमारे परिवार का जिम्मेदार व्यक्ति या कोई बच्चा हो और मां बाप के सामने बच्चा तड़प रहा हो और वह कुछ न कर पा रहे हो तो जरा सोचिए मां बाप अपने बच्चों को मरता हुआ देख लेंगे नहीं ना बस कुछ ऐसी ही मजबूरी रहती है
इस कहानी के माध्यम से मैं आपको बताऊगी कि रिश्ते बोझ क्यों बनते हैं और जिंदगी जीने के लिए पैसे का होना कितना जरूरी है
Through this story, I will tell you why relationships become a burden and how essential money is for living life
आगे का बचा हुआ पाठ रिश्ते ज़िम्मेदारी है बोझ नहीं इसके भाग 2 में मिलेगा
