“कोरे पन्नों से कामयाबी तक”

​अध्याय 1: शुरुआत और हालात (शून्य का अनुभव)​ सुबह के ठीक साढ़े चार बजे थे। हवा में हल्की सी ठंडक थी, लेकिन कमरों के भीतर की उमस अभी पूरी तरह…

सच्चाई एक कड़वा जहर

अध्याय 1: बेरोजगारी का महासागर और डिग्रियों की रद्दी​भूमिका: सपनों का श्मशानभारत एक युवा देश है, लेकिन आज यही युवा शक्ति हताशा के दौर से गुजर रही है। जब एक…

भारत में कोरोना काल

​भूमिका: संकट में समाधान या मनोरंजन?इतिहास जब भी कोरोना काल का मूल्यांकन करेगा, तो वह केवल वायरस और मौतों की बात नहीं करेगा, बल्कि वह उन अजीबोगरीब ‘नुस्खों’ की भी…

अध्याय 57: आपदा में अवसर—कोरोना काल का काला सच और राजनीतिक क्रूरता

​भूमिका: श्मशान की आग और सत्ता की चमकसाल 2020 और 2021 भारत के इतिहास के वे काले पन्ने हैं जिन्हें कोई याद नहीं करना चाहता, लेकिन एक लेखक के तौर…

​अध्याय 59: लोकतंत्र का गिरता चौथा स्तंभ—मीडिया या सत्ता का लाउडस्पीकर ?​

भूमिका: निष्पक्षता का अंत और चाटुकारिता का उदयलोकतंत्र के चार आधार स्तंभ होते हैं: विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और मीडिया। पहले तीन स्तंभों पर नजर रखने और उनकी कमियों को जनता…

“कोरे पन्नों से कामयाबी तक”

​अध्याय 1: शुरुआत और हालात (शून्य का अनुभव)​ सुबह के ठीक साढ़े चार बजे थे। हवा में हल्की सी ठंडक थी, लेकिन कमरों के भीतर की उमस अभी पूरी तरह…

सच्चाई एक कड़वा जहर

अध्याय 1: बेरोजगारी का महासागर और डिग्रियों की रद्दी​भूमिका: सपनों का श्मशानभारत एक युवा देश है, लेकिन आज यही युवा शक्ति हताशा के दौर से गुजर रही है। जब एक…

भारत में कोरोना काल

​भूमिका: संकट में समाधान या मनोरंजन?इतिहास जब भी कोरोना काल का मूल्यांकन करेगा, तो वह केवल वायरस और मौतों की बात नहीं करेगा, बल्कि वह उन अजीबोगरीब ‘नुस्खों’ की भी…

अध्याय 57: आपदा में अवसर—कोरोना काल का काला सच और राजनीतिक क्रूरता

​भूमिका: श्मशान की आग और सत्ता की चमकसाल 2020 और 2021 भारत के इतिहास के वे काले पन्ने हैं जिन्हें कोई याद नहीं करना चाहता, लेकिन एक लेखक के तौर…

​अध्याय 59: लोकतंत्र का गिरता चौथा स्तंभ—मीडिया या सत्ता का लाउडस्पीकर ?​

भूमिका: निष्पक्षता का अंत और चाटुकारिता का उदयलोकतंत्र के चार आधार स्तंभ होते हैं: विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और मीडिया। पहले तीन स्तंभों पर नजर रखने और उनकी कमियों को जनता…

अध्याय 60: रसोई पर डाका—4000 का सिलेंडर और सरकार का सफेद झूठ​1. भूमिका:

चूल्हे की आग और पेट की भूखएक समय था जब राजनीति में 10-20 रुपये की महंगाई बढ़ने पर सड़कें जाम हो जाती थीं, नेता संसद के बाहर गैस सिलेंडर लेकर…